राजस्थान : विधानसभा चुनावों में कितना कारगर है नोटा, पूरी कहानी यहां समझिए

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हरियाणा में 5 जिलों में आने वाले दिनों में नगर निगम के चुनाव होने हैं और नोटा एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल हरियाणा सरकार के नोटा को एक प्रत्याशी की तरह अहमियत देने के फैसले से हलचल तेज हो गई है। राजस्थान विधानसभा चुनावों में पिछली बार नोटा को लागू किया गया था लेकिन यहां नोटा कुछ खास असर अभी तक नहीं दिखा पाया है।

नोटा भले ही प्रभावी ना हों लेकिन जनता के वोट नोटा को खुलकर जाते हैं तो परिणामों के समय कई पार्टी और नेताओं के समीकरण बिगड़े हुए देखने को मिलते हैं। अगर हम राजस्थान में पिछली बार हुए विधानसभा चुनावों की बात करें तो 11 सीटों पर जीतने वाले का अंतर नोटा के वोट से कम था। इसके अलावा 56 पार्टियों में से 50 पार्टियां को तो नोटा से भी कम वोट मिले।

नेता जीते लेकिन जीतने का अंतर नोटा वोट से भी कम

राजस्थान की 11 विधानसभा सीटों पर नोटा का कमाल देखने को मिला, जहां जीतने वाले प्रत्याशियों को जीत तो मिली लेकिन उनके जीत का अंतर नोटा वोट के आगे कुछ भी नहीं था। प्रदेश की कोलायत, दांतारामगढ़, शाहपुरा, आमेर, लालसोट, कुशलगढ़, निंबाहेड़ा, गोगूंदा, झाड़ोल, डूंगरपुर, सागवाड़ा इन सीटों पर नोटा काफी प्रभावी दिखा।

इसके अलावा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की खुद की सीट झालरापाटन पर भी लोगों ने जमकर नोटा दबाया।

सिर्फ 6 पार्टियों को मिले नोटा से ज्यादा वोट

चुनावों में हर बार हर राज्य से नई पार्टियां चुनाव लड़ती है। ऐसे में पिछले चुनाव में कुल 56 पार्टियों ने चुनाव लड़ा जिनमें से 50 पार्टियां ऐसी थी जिनको मिले वोट नोटा वोट से भी कम थे। सूबे की भाजपा, कांग्रेस, बसपा, नेशनल पीपुल्स पार्टी, जद(यू) ही नोटा से अधिक वोट ले सकी।

अगर हम आंकड़ों पर गौर करें तो राजस्थान के 4,08,29,312 मतदाताओं में से 3,86,37,241 वोट डालने गए। जिनमें से 5,89,923 वोट नोटा को मिले यानि कि 1.92% लोगों ने किसी को पसंद नहीं किया। वहीं कुल 2296 प्रत्याशियों में से 1,300 को मिले वोट नोटा से भी कम थे।

क्या है ये नोटा‘?

नोटा का मतलब होता है ‘नन ऑफ द अबव’, हिंदी में कहें तो ऊपर दिए गए नामों में से कोई भी पसंद नहीं है। चुनाव आयोग ने हर वोटर को नोटा यूज करने का अधिकार दिया है। नागरिक अधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज नामक संगठन की लगाई गई एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए 27 सितंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने नोटा को लागू किया फिर चुनाव आयोग ने ईवीएम में नोटा का बटन उपलब्ध कराया।

सबसे पहले कब इस्तेमाल हुआ

नोटा को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद 2013 में हुए छत्तीसगढ़, मिजोरम, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली के विधानसभा चुनाव हुए। इन चुनावों में पहली बार नोटा का उपयोग किया गया था जिसमें 15 लाख लोगों ने नोटा दबाया। फिऱ देश के हर चुनावों में नोटा का इस्तेमाल किया जाने लगा।

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