स्पेशल: अभिनेत्री नसीम बानो अपने स्कूल के दिनों में पालकी से जाया करती थीं स्कूल

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भारतीय सिनेमा में कई अभिनेत्रियां हुई, जिनमें कुछ को उनकी अदाकारी के लिए तो कुछ को उनकी दिलकश अदाओं के लिए जाना जाता है। लेकिन आज हम जिनकी बात कर रहे हैं उनको जमाना उनके हुस्न के लिए खास तौर पर याद करता है। जी हां, चालीस के दशक की एक ‘ब्यूटी क्वीन’ नसीम बानो को आज न जाने कितने ही सिनेमा प्रेमी भुला चुके होंगे, लेकिन अपने समय में उनका जलवा था। 18 जून को अभिनेत्री नसीम बानो की 19वीं पुण्यतिथि है। ऐसे में इस खास मौके पर जानते हैं उनके बारे में…

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नजर से बचाने के लिए पर्दे में रखते थे घरवाले

अभिनेत्री नसीम बानो का जन्म दिल्ली के एक रसूखदार परिवार में 4 जुलाई, 1916 को हुआ था। उनके शाही अंदाज का पता इस बात से ही लगाया जा सकता है कि वो बचपन में पालकी में स्कूल जाया करती थीं। बचपन से ही उनकी सुंदरता देख हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता। इसलिए घरवाले लोगों की नजर से बचाने के लिए उन्हें पर्दे में रखा करते थे।

फिल्म की शूटिंग देखकर लगा हीरोइन बनने का चस्का

फिल्म जगत में आने का नसीम बानो का कोई इरादा नहीं था। वहीं, उनकी माता भी उनको डॉक्टर बनाना चाहती थी। लेकिन उनकी किस्मत उन्हें संयोगवश ही सही फिल्मी दुनिया की दहलीज पर ले गई। दरअसल, हुआ यूं कि स्कूल की छुटियों के दौरान जब एक बार नसीम ने फिल्म ‘सिल्वर किंग’ की शूटिंग देखी तो मंत्रमुग्ध हो गईं। उसी दिन से नसीम ने हीरोइन बनने का फैसला कर लिया था। हालांकि, उनकी सुंदरता देखकर भी फिल्मकारों ने उन्हें ऑफर देने शुरू कर दिए थे, लेकिन उनकी मां ने हर बार उनके ऑफर ठुकरा दिए। आखिरकार फिल्म ‘हेमलेट’ के लिये, जब नसीम के पास बतौर अभिनेत्री का ऑफर आया तो उन्होंने अपनी मां को इस बार मना लिया।

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पहली फिल्म सुपरहिट होने के बाद छूट गया स्कूल

वर्ष 1935 में जब नसीम बानो की पहली फिल्म ‘हेमलेट’ बड़े पर्दे पर आई तो हर किसी ने उन्हें काफी पसंद किया। इसके बाद नसीम के लिए फिल्मों की लाइन लग गई। इसी बीच उन्हें फिल्मों के लिए अपना स्कूल छोड़ना पड़ा। उनकी दूसरी फिल्म ‘खां बहादुर’ के बाद उन्हें ‘ब्यूटी क्वीन’ का ताज मिला। वर्ष 1939 में आई फिल्म ‘पुकार’ नसीम के कॅरियर की सबसे अहम फिल्म मानी जाती है।

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Image: Saira with Naseem Bano.

नसीम को अपनी बेटी के कॅरियर के लिए लेना पड़ा संन्यास

आज भी शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि नसीम बानो अपने जमाने की मशहूर फिल्म अभिनेत्री और अभिनेता दिलीप कुमार सायरा की पत्नी सायरा बानो की मां थीं। फिल्म इंडस्ट्री में सायरा बानो जब अपनी जगह तलाश रही थी, तब अपनी बेटी के लिए नसीम ने फिल्में छोड़ दी और बेटी के कॅरियर को बनाने में लग गईं। हिंदी सिनेमा में लगभग चार दशक तक अपनी खूबसूरती का जलवा दिखाने वाली नसीम बानो ने 18 जून, 2002 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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