विशेष: अभिनेत्री नंदा कर्नाटकी ने 53 साल की उम्र में फिल्म निर्देशक से की थी सगाई

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Nanda-Karnataki-Biography

बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री नंदा कर्नाटकी अपने दिलकश अदाओं और बेहतरीन अभिनय के दम पर हिंदी सिनेमा की एक बेहतरीन अदाकारा के रूप में याद की जाती हैं। उनका जन्म 8 जनवरी, 1938 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था। आपको जानकर हैरानी होगी मगर, नंदा कभी फिल्मों में काम करना नहीं चाहती थी। जन्मदिन के इस खास मौके पर जानते हैं उनकी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें..

फिल्मी परिवार में हुआ था नंदा का जन्म

अभिनेत्री नंदा कर्नाटकी का जन्म एक फिल्मी परिवार में हुआ था। उनके पिता विनायक दामोदर मराठी फिल्मों के सफल अभिनेता और निर्देशक थे, जो अपने दौर में मास्टर विनायक नाम से खासे मशहूर थे। जब नंदा 5 साल की थी तब अपने पिता के कहने पर उनकी एक फिल्म में काम करने के लिए अनमने मन से तैयार हुई थी, मगर फिल्म पूरी होने से पहले ही नंदा के पिता चल बसे। परिवार आर्थिक संकट से घिर गया। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदार नन्दा के मासूम कंधो पर आ गई। यही वजह थी कि ना चाहते हुए भी फिल्मों की ओर रुख करना पड़ा।

बतौर बाल कलाकार हुई फिल्मी सफर की शुरुआत

अभिनेत्री नंदा कर्नाटकी जब महज 10 साल की थी तब उन्होंने फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम करना शुरू कर दिया था। नन्दा ने अपने सिने सफर की शुरुआत मराठी सिनेमा से की। उनकी पहली फिल्म दिनकर पाटिल के निर्देशन में बनी ‘कुलदेवता’ थी, जिसमें बेहतरीन अदायगी के लिए उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पुरस्कृत भी किया। बॉलीवुड में उन्होंने बतौर अभिनेत्री वर्ष 1957 में अपने चाचा वी शांताराम की फिल्म ‘तूफान और दिया’ से कदम रखा था।

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‘धूल का फूल’ कॅरियर में टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई

वर्ष 1959 में नंदा कर्नाटकी की फिल्म ‘छोटी बहन’ रिलीज हुईं। इस फिल्म के जरिये नन्दा दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रहीं। इसी साल उनकी फिल्म ‘धूल का फूल’ रिलीज हुई, जो टिकट खिड़की पर सुपरहिट रही। यह फिल्म उनके बॉलीवुड कॅरियर में टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई। बस फिर क्या था इसके बाद नंदा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

ये हैं अभिनेत्री नंदा की बेहतरीन फिल्में

बॉलीवुड अभिनेत्री नंदा कर्नाटकी ने अपने कॅरियर में ‘काला बाजार ‘, ‘चार दीवारी’, ‘मेंहदी लगी मेरे हाथ’, ‘जब जब फूल खिले’, ‘असलियत’(1974), ‘जुर्म और सजा’(1974) और ‘प्रायश्चित’(1977) जैसी फिल्में की हैं। फिल्म इंडस्ट्री में नन्दा को दर्शक मासूमियत और प्यारी सी लड़की की छवि में ही देखना पसंद करते थे। यही वजह थी कि जब-जब वे लीक से हटी, दर्शकों ने उनकी फिल्मों को नापसंद किया।

ज़िंदगी भर सच्चे प्यार को तरसती रही नंदा

अभिनेत्री नंदा कर्नाटकी अपने सिने कॅरियर और अपनी पारिवारिक जिम्मदारियों में इतनी उलझ गई थी कि वे अपने ऊपर कभी ध्यान ही नहीं दे पाईं। नन्दा शर्मिले स्वभाव की थी, मगर कॅरियर के दौरान वे निर्देशक मनमोहन देसाई को दिल दे बैठी। दोनों के दिलों में एक-दूसरे के लिए मोहब्बत तो थी मगर कभी जाहिर नहीं की। कुछ समय बाद मनमोहन ने सगाई कर ली और नंदा अकेली रह गई।

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कुछ समय बाद ही मनमोहन देसाई की पत्नी का निधन हो गया, जिसके बाद मनमोहन ने नंदा के सामने प्यार का इजहार किया और दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। वर्ष 1992 में दोनों ने सगाई कर ली। उस वक्त नंदा दामोदर कर्नाटकी 53 साल की थी। मगर, सगाई के कुछ दिनों बाद ही मनमोहन की एक हादसे में मौत हो गई। इस तरह वे आजीवन अविवाहित रहीं।

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