‘सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है’ जयंती पर पढ़िए अभिनेता अजीत खान के फेमस डायलॉग्स

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हामिद अली खान जो बॉलीवुड में अजीत नाम से जाने जाते हैं। आज 27 जनवरी को उनकी 100वीं जयंती है। उन्होंने चार दशकों तक सिने पर्दे पर 200 से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय कौशल का जादू दिखाया। बतौर मुख्य अभिनेता अजीत को ‘नास्तिक’, ‘बड़ा भाई’, ‘मिलन’, ‘मुगल-ए आजम’, और ‘नया दौर’ से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान मिलीं। अभिनेता अजीत खान का जन्म 27 जनवरी, 1922 को हैदराबाद के गोलकुंडा में हुआ था।

ऐसे हुई थी फिल्मी सफ़र की शुरुआत

हामिद अली खान उर्फ अजीत का रुझान बचपन से ही अभिनय की तरफ था। उन्होंने अपने शौक को पूरा करने के लिए कॉलेज की किताबें तक बेच दी और मुंबई का रुख किया। अजीत का एक्टिंग कॅरियर वर्ष 1940 में शुरु हुआ था। शुरुआती दौर में उन्हें कुछ ख़ास सफलता नहीं मिलीं। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने के लिए उन्हें कई वर्षों के संघर्ष का सामना करना पड़ा था। 40 का दशक उनके फिल्मी कॅरियर के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा। इस दशक में हिंदी सिनेमा में अभिनेता अजीत ने अपने नेगेटिव किरदारों को लेकर जबरदस्त सुर्खियां बटौरी थी। ऐसे में इस ख़ास मौके पर पढ़िए उनके ये मशहूर डायलॉग्स…

1. फिल्म- कालीचरण

“सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है”

2. मुगल-ए-आजम

“मेरा जिस्म जरूर जख्मी है, लेकिन मेरी हिम्मत जख्मी नहीं”

3. फिल्म जंजीर(1973)

“कुत्ता जब पागल हो जाता है तो उसे गोली मार देते हैं।”

4. मुगल-ए-आजम

“राजपूत जान हारता है, वचन नहीं हारता”

5. फिल्म- जंजीर(1973)

“आओ विजय, बैठो और हमारे साथ एक स्कॉच पियो…हम तुम्हे खा थोड़ी जाएंगे…वैसे भी हम वैजिटेरियन हैं।”

6. फिल्म- जंजीर(1973)

“जिस तरह कुछ आदमियों की कमजोरी बेईमानी होती है, इसी तरह कुछ आदमियों की कमजोरी ईमानदारी होती है।”

7. फिल्म- बेताज बादशाह

लम्हों का भंवर चीर के इंसान बना हूं, एहसास हूं मैं वक्त के सीने में गढ़ा हूं।

8. फिल्म – जंजीर(1973)

“अपनी उम्र से बढ़कर बातें नहीं करते”

9. फिल्म-राज तिलक

“जिनकी रगो में राजपूती खून होता है, उनके जिस्म पर दुश्मन के दिए हुए घाव तो होते है, लेकिन उनकी तलवार कफन की तरह कोरी नहीं होती।”

10. फिल्म- आजाद

“जिंदगी सिर्फ दो पांव से भागती है…और मौत हजारों हाथों से उसका रास्ता रोकती है।”

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