वो 5 बाबा जो तोड़ सकते हैं शिवराज का फिर मुख्यमंत्री बनने का सपना

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देश हो या किसी राज्य की राजनीति सियासी हल्कों में बाबाओं और संतों का बोलबाला हर दिन बढ़ता जा रहा है। चुनावी समीकरण तय करने में आज बाबा अहम भूमिका निभा रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति में इस बार के विधानसभा चुनावों में साधु-संतों और बाबाओं का दबदबा है।

मुख्य चुनावी पार्टियां चुनावों से पहले संतों और बाबाओं को मनाकर अपने वोटों का गणित बिठाने में लगी हुई है।

कंप्यूटर बाबा-

श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नामदेव त्यागी या कंप्यूटर बाबा जो कि दिगंबर अखाड़े से आते हैं। मध्यप्रदेश के लोगों में कंप्यूटर बाबा की काफी अच्छी पैठ है। रामानंद संप्रदाय से ताल्लुक रखने वाले ये बाबा संतों को आगे आकर राजनीतिक भूमिका निभाने में विश्वास रखते हैं। बीजेपी के कई बड़े नेताओं से इनके काफी अच्छे संबंध है।

शंकराचार्य स्वरूपानंद-

कांग्रेस के करीबी माने जाने वाले ज्योतिर्मठ-द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद बीजेपी का खेल बिगाड़ सकते हैं। संघ और बीजेपी के खिलाफ उन्हें कई बार खुलकर विरोधी स्वर बोलते देखा गया है। माना यह जा रहा है कि स्वरूपानंद मध्य प्रदेश के महाकौशल की तीन दर्जन विधानसभा सीटों पर वर्चस्व रखते हैं।

देवकीनंदन ठाकुर-

एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ मुखर आवाज उठाने वाले कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर मूलत: यूपी के रहने वाले हैं लेकिन मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में भी उनकी गूंज है। राज्य में अपने 10 लाख अनुयायियों के दम पर वो सियासी चुनौती दे सकते हैं। गौरतलब है कि देवकीनंदन ठाकुर ने चुनाव में 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के लिए अखंड भारत पार्टी बनाई हैं।

देव प्रभाकर (दद्दा जी)-

शिवराज सरकार के कई मंत्रियों से करीबी रिश्ते रखने वाले देव प्रभाकर के कई इलाकों में 5 लाख से अधिक अनुयायी हैं।

ऋषभचंद्र सुरीश्वर-

जैन समाज से आने वाले ऋषभचंद्र सुरीश्वर जाने-माने ज्योतिषशास्त्री हैं। जैन समुदाय में अच्छी पकड़ रखने के साथ-साथ राज्य के कई मंत्रियों से इनके काफी करीबी रिश्ते हैं।

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