‘तूमने उसे मारा जो कश्मीर से प्यार करता था, अब हमें भी मार दो’

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अपने की अनचाही मौत पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ देती है। इस वक्त को समझना और फिर संभलना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे ही दौर से इन दिनों जम्मू कश्मीर पुलिस के उप निरीक्षक इम्तियाज अहमद मीर के परिवार के लोग गुजर रहे हैं। मीर की कुछ दिनों पहले आतंकियों ने हत्या कर दी थी जब वे हुलिया बदलकर अपने परिवार से मिलने जा रहे थे। मीर की हत्या का दंश झेल रहे परिवार ने अब आतंकियों के नाम खुला खत लिखा है, जिसमें उनकी पीड़ा साफ झलक रही है।

मीर सीआईडी में थे। मीर को उनके गांव में नहीं जाने की चेतावनी दी गयी थी, क्योंकि डर था कि आतंकवादी उनपर हमला कर सकते हैं। लेकिन मीर का मन नहीं मान रहा था और वे अपने परिवार से मिलना चाहते थे। मीर ने दाढ़ी काट ली और अपना पूरा हुलिया बदल लिया था ताकि आतंकवादियों से बचते हुए वे अपने मां—बाप से मिलने जा सकें। लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और आतंकवादियों ने उन्हें पहचान कर उनकी जान ले ली। दक्षिण कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित पुलवामा जिले के बाहीबाग में रविवार की सुबह आतंकवादियों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी।

यह लिखा है खत में

‘उपनिरीक्षक मीर इम्तियाज के हत्यारों को खुला खत’ शीर्षक से किसी अज्ञात लेखक ने लिखा, ‘तुमने ने एक बूढ़ी मां के प्यारे और एक बूढ़े बाप के आज्ञाकारी बेटे की हत्या की है। तुमने एक ऐसे भाई को मार डाला जो अपने भाई और बहन का एकमात्र सहारा था। तुमने उस लड़की के हर सपने को मार डाला जो शादी करना चाहती थी।
तुमने उस शख्स की हत्या की है जिसके सूफी विचार थे, ऐसा शख्स जो सूफीवाद को खूब पढ़ता था। जो काल मार्क्स और हर अलग विचारधारा को पढ़ता था। सबसे खास बात कि तुमने लोगों ने एक ऐसे शख्स को मार डाला जो कश्मीर और उसके लोगों को बेइंतहा प्यार करता था। जो खुशहाल कश्मीर को देखना था।’
तुमने उस शख्स को मारा है जो मास्टर्स था जो अपने एसआई बैच का टॉपर था। तुमने उस शख्स को मारा है, जो अपने बुजुर्ग मां-बाप और दुखों में घिरी बहन से मिलना चाहता था। जब तुमने उसे मारा तो हम सबको क्यों नहीं मार डाला। आओ हमें भी मारो…हम उसके बिना नहीं रह सकते।’

मना किया गया था मीर को

गौरतलब है कि आतंकवादियों ने हाल में कश्मीर के कई पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया है। मीर के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ‘मैंने उससे कहा था कि वह ना जाए क्योंकि आतंकवादी हमला कर सकते हैं। लेकिन वह अपने माता पिता को देखने के लिए बेकरार थे, जो पुलवामा जिले के अंदरूनी इलाके सोनताबाग में रहते हैं। उन्होंने घर जाने के लिए छुट्टी ली और अपना हुलिया बदल लिया। उन्होंने अपनी दाढ़ी काट ली और अपने पैतृक गांव जाने के लिए अपने व्यक्तिगत वाहन का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया।

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